कायस्थ सभा यमुना विहार
(1980 से निरंतर कार्यरत)
कायस्थ सभा यमुना विहार
(1980 से निरंतर कार्यरत)
कायस्थ सभा यमुना विहार
(1980 से निरंतर कार्यरत)
कायस्थ सभा यमुना विहार
(1980 से निरंतर कार्यरत)
कायस्थ सभा यमुना विहार
(1980 से निरंतर कार्यरत)
कायस्थ सभा यमुना विहार
(1980 से निरंतर कार्यरत)
कायस्थ सभा यमुना विहार
(1980 से निरंतर कार्यरत)
कायस्थ सभा यमुना विहार
(1980 से निरंतर कार्यरत)
🏛 कायस्थ सभा यमुना विहार
कायस्थ सभा यमुना विहार, दिल्ली – एक सशक्त, संगठित एवं प्रगतिशील मंच, जो कायस्थ समाज को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से निरंतर कार्यरत है। यहाँ हम समाज के हर वर्ग को जोड़ने, सहयोग प्रदान करने और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय हैं। हम अपनी प्राचीन बौद्धिक परंपरा, लेखन-कौशल, प्रशासनिक व रचनात्मक क्षमताओं पर गर्व करते हैं और हमारा प्रयास है कि समाज के हर वर्ग – चाहे वह युवा हो, वरिष्ठ हो, विद्यार्थी, व्यवसायी या गृहिणी – सभी एक दूसरे के साथ ज्ञान, संसाधन, सहयोग एवं सांस्कृतिक विरासत को साझा कर सकें। हमारा उद्देश्य केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सहायता, परंपराओं के संरक्षण तथा युवा सशक्तिकरण के माध्यम से एक मजबूत समुदाय का निर्माण करना है—जहाँ हर सदस्य सुरक्षित, समर्थ और गौरवान्वित महसूस करे।
हम मानते हैं कि संगठन ही शक्ति है, और जब समाज एकजुट होता है, तो विकास स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ता है। इसी भावना के साथ हम, हर सदस्य के साथ विश्वास, सहयोग और सकारात्मक परिवर्तन की ओर कदम बढ़ा रहा है।
- स्थापना वर्ष: 09 मार्च 1980
- संस्थापक: स्वर्गीय श्री जय नारायण सक्सेना
“आइए, साथ आएँ – एकता, उन्नति और सांस्कृतिक गौरव की ओर कदम बढ़ाएँ।"
👤 संस्थापक का परिचय
स्वर्गीय श्री जय नारायण सक्सेना
“कायस्थ सभा यमुना विहार ” के संस्थापक स्वर्गीय श्री जय नारायण सक्सेना एक दूरदर्शी, समाजसेवी एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे।
उन्होंने कायस्थ समाज को एकता, संवाद और समर्पण की भावना से जोड़ने के उद्देश्य से स्थापना की।
उनका मानना है कि किसी भी समाज की शक्ति उसकी पहचान और संवाद में निहित होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने 09 मार्च 1980 में
“कायस्थ सभा यमुना विहार ” की शुरुआत की — ताकि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के विचार, उपलब्धियाँ और अनुभव
एक साझा मंच पर आ सकें।
स्वर्गीय श्री जय नारायण सक्सेना जी ने अपने जीवन में सदैव समाजहित को प्राथमिकता दी है। उनका उद्देश्य केवल एक सभा चलाना
नहीं, बल्कि एक ऐसी सशक्त धारा प्रवाहित करना है जो कायस्थ समाज की संस्कृति, परंपरा और आधुनिक सोच — तीनों को
एक साथ जोड़े रखे।
उनके मार्गदर्शन में “कायस्थ सभा यमुना विहार ” आज समाज की आवाज़ बन चुकी है और निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
“संवाद से समाज, और समाज से संस्कार” — यही उनके जीवन का मूलमंत्र है।
🎯 हमारा उद्देश्य
“कायस्थ सभा यमुना विहार” समाज के सर्वांगीण विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और एकता को सशक्त बनाने हेतु निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्यों के साथ कार्यरत है:
- यथा संभव भगवान श्री चित्रगुप्त जी महाराज की मूर्ति तथा मंदिर की स्थापना करना।
- भारत वर्ष के प्रमुख धार्मिक स्थलों में कायस्थ धर्मशाला का निर्माण कराना।
- समाज को एक मजबूत सामाजिक, सांस्कृतिक तथा व्यावसायिक नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना।
- समाज की विरासत, संस्कृति, परंपराएँ और बौद्धिक पहचान को संरक्षित व प्रोत्साहित करना।
- शिक्षा, छात्रवृत्ति, पुस्तक-सहायता और मार्गदर्शन के माध्यम से युवाओं को सक्षम बनाना।
- गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक आयोजन नियमित रूप से आयोजित करना।
- समुदाय में एकता, गौरव, प्रगतिशील सोच एवं सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की भावना को सशक्त करना।
- समाज में अवसरों की समानता स्थापित करना और हर वर्ग को प्रगति की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना।
- कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमशीलता को प्रोत्साहन देना।
- महिला सशक्तिकरण और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देना।
“एक संगठित समाज – प्रगति, सम्मान और संस्कृति की मजबूत पहचान”
📌 समितियाँ
📝 संपादकीय समिति
अरुण सक्सेना
मुख्य संपादक
हरीश गोविंद सक्सेना
सह संपादक
राजीव श्रीवास्तव
सह संपादक
🏨 धर्मशाला निर्माण समिति
हरीश गोविंद सक्सेना
अध्यक्ष